ओ बिटिया मेरी
बिटिया
जब मैं हंसती थी बाबुल तब तू हंसता था बाबुल,
जब मैं रोती थी बाबुल तब तू रोता था बाबुल,
मेरा पहला कदम जब उठा था,मानों तू खुद चला था बाबुल,
जब मैं पहला अक्षर लिखी थी,माना तू साक्षर हो गया था बाबुल,
मन की आशायें कम कर के तू मुझ में जीता था बाबुल,
अब मैं 18 बरस की हो चली,तुम्हारे दिल का बोझ हो चली थी बाबुल,
तुम्हारे आँगन को छोड़ के जा रहीं हूँ मैं बाबुल,
अपनों से दूर न समझना तू बाबुल,
मैं वापस तेरे आँगन में आऊँगी बाबुल,
जब खेतों में लहलहायेंगे गेहूं –धान की बालियाँ,
उन श्वेत कपासों में एहसास करना मेरा बचपन तू बाबुल,
महसूस करना मुस्कुरा रही हूँ तेरे खेतों में बाबुल,
बेटी मेरी तू बोझ नहीं खुशी थी बाबुल की घर की,
तू तुलसी थी आँगन की वो मेरी बिटिया,
तेरे बिन है सुनी अब मेरी कुटिया,
मुझे माफ करना वो लाडो मेरी,
मैं समझा न दर्द तेरा वो मेरी गुड़िया,
न जाना न समझा मजबूरी तेरी
मैं करता हूँ वादा अगले जन्म में जाने न दूंगा
मेरी प्यारी नन्ही सी गुड़िया संभाले रखूँगा,
साँसे रहेगी,अगले जन्म में तुझे खोने न दूंगा |
👌Amazing 😢
जवाब देंहटाएंBahut khub
जवाब देंहटाएंNice lines
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