हिन्दी साहित्य, कविता और आलोचना
तेरे हिज़्र में मैं पागल न हो जाऊं,
तेरा इश्क़ है मुझ पे बेहताश परवान चढ़ा हुआ,
तेरे हिज़्र मेरा बदनसीब है,
तेरी चाहत ही मेरी हयात है,
बहुत खूबसूरत 😊♥️
बहूत सुंदर लिखा है अपने
बहुत खूबसूरत 😊♥️
जवाब देंहटाएंबहूत सुंदर लिखा है अपने
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